देहरादून– खत सिली गोथान के अन्तर्गत आने वाले ग्राम दातनू में एक अहम बैठक का आयोजन किया गया।बैठक की अध्यक्षता कृपाल सिंह चौहान ने की। जिसमें क्षेत्र के कई गणमान्य व्यक्ति बड़ी संख्या में मौजूद रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य विवाह और सामाजिक परंपराओं में फैल रहे अनावश्यक खर्च और दुरुपयोग पर नियंत्रण रखना है। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि ग्राम दातनू में अब ब्याह और सामाजिक कार्यक्रम में बीयर का परोसना पूर्णत: प्रतिबंध रहेगा। साथ ही रस्वाड़ भोज की रस्म को समाप्त कर दिया गया है। बैठक में ग्रामीणों ने कहा कि इन प्रथाओं से आर्थिक बोझ बढ़ता है और सामाजिक वातावरण पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है।
शादी-ब्याह में अब नहीं मजा ले पायेंगे टिक्की, चाऊमीन और दारू और फास्टफूड का स्वाद। उत्तराखंड के खत्त 25 गांवों ने लिया फैसला। शादी-ब्याह में लोग चाट-टिक्की, मोमो, पिजजा, बर्गर, डोसा, गोलगप्पे बड़े ही चाव से खाते हैं। खासकर बच्चे और महिलाएं शादी-ब्याह में जाते ही हैं, इसलिए लजीज, चटपटा और फास्टफूड खाने को मिलेगा, लेकिन उत्तराखंड के चकराता क्षेत्र के इन 25 गांवों की शादियों में अब ऐसा खाना नहीं मिलेगा।
उत्तराखंड के जौनसार-बावर क्षेत्र में शादी-ब्याह में अब शराब और फास्ट फूड से मेहमानों की खातिरदारी करने वालों की अब खैर नहीं होगी। गलती से भी अब गोलगप्पा, चाऊमीन, पाव-भाजी, पिज्जा और पास्ता जैसी चीजों से मेहमाननवाजी करने की कोशिश की तो 1 लाख रुपये का जुर्माना भरना पड़ेगा। अब दूल्हा-दुल्हन को महंगे तोहफे भी नहीं दिए जा सकेंगे। अब शादी में अंग्रेजी शराब तो दूर लोगों को मनपसंद फास्टफूड खिलाने पर भी अब पाबंदी लगा दी गई है। चकराता क्षेत्र के दर्जनों गांवों में पहले से ही शादी समारोह में तीन से ज्यादा गहनों पर पाबंदी लगाई थी। अब शराब और फास्टफूड पर भी पाबंदी लगा दी गई है। अगर जो भी ग्रामीण इन नियमों को नहीं मानेगा तो उस पर खत की तरफ से एक लाख रुपये तक का जुर्माना और खत्त समाज की तरफ से उस परिवार का बहिष्कार किया जाएगा, जो कोई भी ग्रामीण उसका साथ देगा, तो उसका भी बहिष्कार किया जाएगा।
उत्तराखंड के जौनसार-बावर क्षेत्र के 25 गांवों ने ये फैसला लिया है। क्षेत्रवासियों मानना है कि फैसले के पीछे ग्रामीणों का मकसद है कि समाज में सामाजिक समानता बनाए रखना। इस फैसले से इलाके के लोग नाराज नहीं है, बल्कि खुश हुए हैं। 25 गावों के इस फैसले से उत्तराखंड के बुद्धजीवी तारीफ कर रहे हैं। अब 25 गांव में होने वाली शादियों और शुभ आयोजनों में न तो महंगे तोहफे दिए जाएंगे और न ही मेहमानों को अंग्रेजी शराब और फास्ट फूड का स्वाद चखने को मिलेगा। सिर्फ पारंपरिक खाने का ही स्वाद ही ले सकेंगे। घरेलू कच्ची दारू ही दी जाएगी।
यह फैसला जौनसार-बाबर क्षेत्र के खत शैली के 25 गांवों- हयो, दोउ, दोहा, छूटऊ,मटियावा, बजऊ,कैटत्री,घिंगौऊ,कुनावा मागटी,नगऊ, क्यावा, आदि पर लागू होगा। क्षेत्र के ग्रामीण सरन सिंह ने कहा कि यह फैसला ऐतिहासिक और शादी में समानता लाएगा। शादियों में अब एक जैसी व्यवस्था देखने को मिलेगी। यह फैसला आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के हक में लिया गया है। आज के समय में जिस तरह से महंगाई और शादियों में दिखावा होता है, उसकी वजह से आर्थिक रूप से कमजोर लोग खुद को असहाय महसूस करते थे।
ग्रामीण कृपाल सिंह ने कहा कि सभी ने मिलकर फैसला लिया है कि अंग्रेजी शराब पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जाए। सभी ग्रामीणों ने इस फैसले का स्वागत भी किया है। इसके अलावा मिठाइयों पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। ज्यादा मात्रा में मिठाइयां शादियों में नहीं परोसी जाएंगी।
इससे पहले अक्तूबर महीने में भी जौनसार बाबर क्षेत्र में चकराता के तीन गांवों ने गहनों को लेकर खास फैसला लिया था। उसके मुताबिक, महिलाएं शादी या फिर अन्य कार्यक्रमों में तीन से ज्यादा गहने नहीं पहन सकेंगी। इसके बाद खत शैली के 25 गांव ने भी इस फैसले को अपना लिया है, जिसमें महिलाओं के श्रृंगार को लेकर भी परंपरागत रूप को संरक्षित करने का फैसला लिया गया। अब शादी और रोहिणी भोज में महिलाएं केवल तीन प्रकार के गहने पहन सकेंगी। आभूषणों में नाक में फुली, कान में झुमकी या तूंगल और गले में कांडुडी या मंगलसूत्र ही पहन सकेंगी। यह निर्णय इसलिए लिया गया है कि समाज में समानता बनी और किसी के अन्दर हीन की भावना न रहे। साथ ही पारंपरिक और आर्थिक रूप से कमजोर लोग खुद को असहाय महसूस न करें। यह सभी निर्णय पारंपरिक संस्कृति को सुरक्षित रखने और गैर जरूरी खर्चों पर रोक लगाने के मकसद से लिए गए हैं। इस मौके पर राजेंद्र सिंह चौहान, संत राम सिंह चौहान, कृपाल सिंह चौहान, दिनेश सिंह चौहान, धन सिंह चौहान, भीम सिंह चौहान, दीवान सिंह चौहान, नारायण सिंह खन्ना, कलम सिंह चौहान, केसर सिंह चौहान, गुलाब सिंह चौहान, वीरेंद्र सिंह चौहान, अनिल सिंह,प्रदीप सिंह चौहान और महेंद्र सिंह चौहान, रणवीर सिंह चौहान, जलम सिंह चौहान, रूपराम चौहान, ज्ञान सिंह चौहान, प्रीतम सिंह चौहान, विक्रम सिंह चौहान मेहर सिंह चौहान, समेत तमाम गणमान्य मौजूद रहे।
